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एम.आर.टी.पी. अधिनियम, 1969 का मुख्य उद्देश्य क्या था?
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12 stepsनमस्ते anjli_dilwaliya,
यहाँ आपके प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं:
प्रश्न 6:
एम.आर.टी.पी. अधिनियम, 1969 का मुख्य उद्देश्य था:
प्रश्न को समझें.
प्रश्न एम.आर.टी.पी. (Monopolies and Restrictive Trade Practices) अधिनियम, 1969 के मुख्य उद्देश्य के बारे में पूछ रहा है.
एम.आर.टी.पी.
अधिनियम के उद्देश्य को याद करें.
एम.आर.टी.पी. अधिनियम, 1969 को आर्थिक शक्ति के संकेन्द्रण को रोकने, एकाधिकार को नियंत्रित करने और प्रतिबंधात्मक तथा अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए अधिनियमित किया गया था.दिए गए विकल्पों का मूल्यांकन करें.
- (A) निजी एकाधिकार को बढ़ावा देना: यह अधिनियम के उद्देश्य के विपरीत है.
- (B) विदेशी व्यापार को प्रोत्साहित करना: यह अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नहीं था.
- (C) आर्थिक शक्ति के संकेन्द्रण को रोकना: यह एम.आर.टी.पी. अधिनियम का एक प्रमुख और केंद्रीय उद्देश्य था.
- (D) नौकरशाही नियंत्रण को बढ़ावा देना: यह अधिनियम का मुख्य उद्देश्य नहीं था.
सही विकल्प का चयन करें.
अधिनियम का मुख्य उद्देश्य आर्थिक शक्ति के संकेन्द्रण को रोकना था.
The final answer is
प्रश्न 7:
1956 की औद्योगिक नीति प्रस्ताव किस सिद्धान्त पर आधारित थी?प्रश्न को समझें.
प्रश्न 1956 की औद्योगिक नीति प्रस्ताव के आधारभूत सिद्धांत के बारे में पूछ रहा है.
1956 की औद्योगिक नीति के संदर्भ को याद करें.
1956 की औद्योगिक नीति भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना के साथ आई थी, जिसका मुख्य लक्ष्य "समाजवादी समाज की स्थापना" करना था. इस नीति ने सार्वजनिक क्षेत्र को अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख भूमिका दी और भारी उद्योगों के विकास पर जोर दिया.
दिए गए विकल्पों का मूल्यांकन करें.
- (A) मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था: यह पूंजीवाद की विशेषता है, जो 1956 की नीति का आधार नहीं था.
- (B) समाजवादी समाज की स्थापना: यह 1956 की औद्योगिक नीति और दूसरी पंचवर्षीय योजना का स्पष्ट और घोषित सिद्धांत था.
- (C) पूंजीवादी अर्थव्यवस्था: यह नीति के समाजवादी झुकाव के विपरीत है.
- (D) मिश्रित अर्थव्यवस्था: भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था का मॉडल अपनाया था, लेकिन इसका आधारभूत सिद्धांत समाजवादी समाज की स्थापना था, जिसके लिए मिश्रित अर्थव्यवस्था एक साधन थी.
सही विकल्प का चयन करें.
1956 की औद्योगिक नीति का प्रस्ताव समाजवादी समाज की स्थापना के सिद्धांत पर आधारित था.
The final answer is
प्रश्न 8:
निम्न में से कौन-सा सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों का उद्देश्य नहीं है?प्रश्न को समझें.
प्रश्न पूछ रहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSUs) का कौन-सा एक उद्देश्य नहीं है.
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के सामान्य उद्देश्यों को याद करें.
भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की स्थापना केवल लाभ कमाने के लिए नहीं की गई थी, बल्कि उनके कई सामाजिक और आर्थिक उद्देश्य भी थे, जैसे:
- संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना.
- रोजगार के अवसर पैदा करना.
- आधारभूत संरचना का विकास करना.
- आय असमानताओं को कम करना.
- सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना.
- महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना.
दिए गए विकल्पों का मूल्यांकन करें.
- (A) लाभ अधिकतममीकरण: जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से लाभ कमाने की उम्मीद की जाती है, उनका प्राथमिक या एकमात्र उद्देश्य निजी कंपनियों की तरह लाभ अधिकतममीकरण नहीं होता है. वे अक्सर सामाजिक उद्देश्यों और सार्वजनिक सेवा के साथ लाभ को संतुलित करते हैं.
- (B) संतुलित क्षेत्रीय विकास: यह सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है, क्योंकि उन्हें अक्सर पिछड़े क्षेत्रों में स्थापित किया जाता है.
- (C) रोजगार सृजन: सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान करते हैं, जो उनका एक उद्देश्य है.
- (D) सामाजिक कल्याण: यह सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का एक व्यापक उद्देश्य है, जिसमें विभिन्न सामाजिक लाभ शामिल हैं.
सही विकल्प का चयन करें.
लाभ अधिकतममीकरण सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का प्राथमिक उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह निजी क्षेत्र की कंपनियों का मुख्य उद्देश्य होता है.
The final answer is
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