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गा) पतोहू की रोने पर भी मन का निर्बन्ध क्यों नहीं बदलता?
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(ग) पताहू के रोने पर भी बालगोबिन भगत का निर्णय इसलिए नहीं बदला क्योंकि वे संत स्वभाव के व्यक्ति थे और मृत्यु को शोक का नहीं बल्कि उत्सव का अवसर मानते थे। उनका मानना था कि आत्मा परमात्मा से मिल गई है, जो कि एक आनंद का क्षण है। वे सामाजिक रूढ़ियों और मोह-माया से ऊपर उठकर अपने सिद्धांतों पर अडिग थे।
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