झूम कृषि, चावल, गेहूँ और चाय उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

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झूम कृषि, चावल, गेहूँ और चाय उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

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यहाँ आपके प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं:

  1. झूम कृषि क्या है? झूम कृषि, जिसे स्थानांतरी कृषि भी कहते हैं, एक पारंपरिक कृषि पद्धति है जिसमें जंगल के एक हिस्से को काटकर और जलाकर साफ किया जाता है। राख मिट्टी को उपजाऊ बनाती है, और कुछ वर्षों तक फसलें उगाई जाती हैं। जब मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है, तो किसान नई भूमि पर चले जाते हैं, जिससे पुरानी भूमि को प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित होने का समय मिलता है।

  2. चावल उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें। चावल के उत्पादन के लिए निम्नलिखित भौगोलिक परिस्थितियाँ आवश्यक हैं: • तापमान: उच्च तापमान (25C^\circ\text{C} से ऊपर) की आवश्यकता होती है। • वर्षा: 100 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। • मिट्टी: जल धारण क्षमता वाली जलोढ़ मिट्टी आदर्श होती है। • श्रम: खेती के लिए प्रचुर मात्रा में सस्ते श्रम की आवश्यकता होती है।

  3. गेहूँ उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें। गेहूँ के उत्पादन के लिए निम्नलिखित भौगोलिक परिस्थितियाँ आवश्यक हैं: • तापमान: बढ़ते मौसम में ठंडा तापमान (लगभग 10C^\circ\text{C} से 15C^\circ\text{C}) और पकने के समय तेज धूप (लगभग 20C^\circ\text{C} से 25C^\circ\text{C}) की आवश्यकता होती है। • वर्षा: 50 से 75 सेमी वार्षिक वर्षा, जो बढ़ते मौसम में समान रूप से वितरित हो। • मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है।

  4. चाय उत्पादन के लिए भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें। चाय के उत्पादन के लिए निम्नलिखित भौगोलिक परिस्थितियाँ आवश्यक हैं: • जलवायु: उष्णकटिबंधीय या उपोष्णकटिबंधीय जलवायु। • मिट्टी और वर्षा: ह्यूमस और कार्बनिक पदार्थ से भरपूर गहरी, उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी। पूरे वर्ष समान रूप से वितरित लगातार वर्षा कोमल पत्तियों के निरंतर विकास को सुनिश्चित करती है। • ढलान: जड़ों के पास पानी के ठहराव को रोकने के लिए हल्की ढलान आवश्यक है। • श्रम: चाय की पत्तियों को तोड़ने के लिए प्रचुर मात्रा में सस्ते और कुशल श्रम की आवश्यकता होती है।

  5. भारतीय कृषि की गुण-पद्धति लिखें। भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं: • जीवन निर्वाह कृषि: अधिकांश किसान मुख्य रूप से अपने उपभोग के लिए फसलें उगाते हैं। • मानसून पर निर्भरता: कृषि भारी मात्रा में वर्षा पर निर्भर करती है। • छोटे भूखंड: भूमि के विखंडन के कारण, भूखंड अक्सर छोटे और अलाभकारी होते हैं। • श्रम-गहन: कृषि में मानवीय श्रम पर अत्यधिक निर्भरता होती है। • कम उत्पादकता: विकसित देशों की तुलना में प्रति हेक्टेयर उत्पादकता अक्सर कम होती है। • फसल विविधता: विविध जलवायु परिस्थितियों के कारण विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं।

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