फ्रांसीसी लोगों के बीच सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने क्या कदम उठाए? मारीआन और जर्मेनिया कौन थे? जिस तरह उन्हें चित्रित किया गया उसका क्या महत्त्व था?

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फ्रांसीसी लोगों के बीच सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने क्या कदम उठाए? मारीआन और जर्मेनिया कौन थे? जिस तरह उन्हें चित्रित किया गया उसका क्या महत्त्व था?

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यहाँ दिए गए प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में प्रस्तुत हैं:

  1. फ्रांसीसी लोगों के बीच सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने क्या कदम उठाए? फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए कई कदम उठाए:

    • उन्होंने 'पितृभूमि' (ला पैट्री) और 'नागरिक' (ले सिटोयेन) के विचारों पर जोर दिया, जिससे एक संयुक्त समुदाय की भावना बनी।
    • एक नया फ्रांसीसी झंडा, तिरंगा, चुना गया जिसने शाही मानक को बदल दिया।
    • स्टेट्स जनरल का नाम बदलकर नेशनल असेंबली कर दिया गया और सक्रिय नागरिकों द्वारा चुना जाने लगा।
    • नए भजन रचे गए, शपथें ली गईं और शहीदों का गुणगान किया गया, ये सब राष्ट्र के नाम पर हुआ।
    • एक केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई जिसने सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाए।
    • आंतरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त कर दिए गए और भार तथा मापन की एक समान प्रणाली अपनाई गई।
    • क्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया गया और पेरिस में बोली जाने वाली फ्रेंच राष्ट्र की साझा भाषा बन गई।
  2. मारीआन और जर्मेनिया कौन थे? जिस तरह उन्हें चित्रित किया गया उसका क्या महत्त्व था?

    • मारीआन फ्रांस का एक नारी रूपक था, जो राष्ट्र के विचार को व्यक्त करता था। उसे लाल टोपी, तिरंगा और कलगी के साथ चित्रित किया गया था। उसकी प्रतिमाएँ सार्वजनिक चौराहों पर लगाई गईं और सिक्कों व डाक टिकटों पर भी उकेरी गईं, ताकि लोगों को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक की याद दिलाई जा सके।
    • जर्मेनिया जर्मन राष्ट्र का नारी रूपक था। उसे ओक के पत्तों का मुकुट पहने हुए चित्रित किया गया था, क्योंकि जर्मन ओक वीरता का प्रतीक है। वह जर्मन शक्ति और राष्ट्रवाद का प्रतीक थी।
    • महत्त्व: इन नारी रूपकों का महत्त्व यह था कि वे अमूर्त विचारों (जैसे स्वतंत्रता, न्याय, गणतंत्र) को एक ठोस रूप देते थे। वे लोगों को एक साझा पहचान और राष्ट्रीय भावना से जोड़ने में मदद करते थे, जिससे राष्ट्रवाद की भावना मजबूत होती थी।
  3. जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया का संक्षेप में पता लगाएँ। जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया 1848 में फ्रैंकफर्ट संसद की विफलता के बाद शुरू हुई। प्रशिया ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके मुख्यमंत्री ऑटो वॉन बिस्मार्क ने 'रक्त और लौह' की नीति अपनाई। उन्होंने प्रशियाई सेना और नौकरशाही की मदद ली। सात वर्षों के दौरान, प्रशिया ने ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस के साथ तीन युद्ध लड़े, जिनमें प्रशिया की जीत हुई। इन युद्धों ने जर्मन राज्यों को प्रशिया के नेतृत्व में एकजुट किया। जनवरी 1871 में, वर्साय में प्रशिया के राजा विलियम प्रथम को जर्मन सम्राट घोषित किया गया, जिससे एक एकीकृत जर्मन साम्राज्य का गठन हुआ।

  4. अपने शासन वाले क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को ज्यादा कुशल बनाने के लिए नेपोलियन ने क्या बदलाव किए? नेपोलियन ने अपने शासन वाले क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को ज्यादा कुशल बनाने के लिए कई बदलाव किए, जिन्हें आमतौर पर नेपोलियन संहिता (1804) के नाम से जाना जाता है:

    • जन्म पर आधारित विशेषाधिकारों को समाप्त कर दिया।
    • कानून के समक्ष सभी को समानता प्रदान की।
    • संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित किया।
    • डच गणराज्य, स्विट्जरलैंड, इटली और जर्मनी में प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया।
    • सामंती व्यवस्था को समाप्त किया और किसानों को भू-दासत्व तथा जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई।
    • शहरों में गिल्ड प्रतिबंधों को हटाया।
    • परिवहन और संचार प्रणालियों में सुधार किया।
    • एक समान कानून, मानकीकृत भार और माप, तथा एक साझा राष्ट्रीय मुद्रा लागू की, जिससे व्यापार में आसानी हुई।
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