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The solution provides answers to two separate passage-based exercises in Marathi, covering comprehension, vocabulary, and critical thinking related to themes like pride and division of labor.
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प्र १ अ. निम्नलिखित परिच्छेद के आधार पर कृतियाँ कीजिए।
कृति १: आकृति पूर्ण करो :: इस प्रकार जिह्वा ने किया दाँतों का वर्णन
- कपटी
- ऊपर से स्वच्छ और अंदर से काले घोषित करने वाली
कृति २: संजाल पूर्ण करो: दाँतों की विशेषताएँ
- पंक्तिबद्ध और एकजुट रहने वाले
- बहुत साहसी
- एक-से-एक मजबूत
- बत्तीस धनिष्ठ मित्र
कृति ४: घमंड मनुष्य के विनाश का कारण बनता है कथन के संदर्भ में अपने विचार लिखिए।
इस परिच्छेद में दाँतों का घमंड स्पष्ट रूप से दिखाया गया है, जो अपनी संख्या और मजबूती पर इतराते हैं। जिह्वा उन्हें उनकी सीमाओं और वृद्धावस्था में उनके अकेलेपन की याद दिलाकर उनके घमंड को तोड़ती है। यह दर्शाता है कि अत्यधिक घमंड व्यक्ति को अपनी कमजोरियों से अनजान कर देता है और अंततः उसे नीचा दिखाता है।
प्र २ अ. निम्नलिखित परिच्छेद के आधार पर कृतियाँ करो।
कृति १: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखिए।
- i) यह हरेक मिल जाता था ......
- शिकार/भोजन
- ii) लोग यहाँ पैसा जमा करते हैं ......
- यह जानकारी दिए गए परिच्छेद में उपलब्ध नहीं है।
कृति २: गद्यांश के आधार पर वाक्य पूर्ण कीजिए:
- i) तब काम बंटे हुए नहीं थे ......
- जब आदमी सिर्फ शिकार पर गुजर-बसर करता था।
- ii) जैसे-जैसे दिन गुजरने लगे ......
- आदमियों ने नये-नये पेशे सीखे और उनमें पकते हो गए।
कृति ३: संजाल पूर्ण करो: काम का विभाजन इनमें हुआ ......
- मर्दों
- औरतों
कृति ४: प्रवाह तालिका का पूर्ण करो: मनुष्य द्वारा खेती करने पर हुए लाभ
- बहुत-सी नई-नई बातें निकलीं
- काम के हिस्से बँट गए
- नये-नये पेशे सीखे
- लोग उनमें पकते हो गए (कुशल हो गए)
प्र ३ अ. निम्नलिखित पद्यांश के आधार पर कृतियाँ करो।
कृति १: आकृति पूर्ण कीजिए: इन बातों में अलग होकर भी हम एक हैं
- धर्म
- भाषा
- विविध रंग
कृति २: संजाल पूर्ण करो: ये बातें निरर्थक हैं ......
- कोई छोटा है
- कोई बड़ा है
कृति ३: धर्म अलग, भाषा अलग, फिर भी हम सब एक, विविध रंग करते नहीं, हमको कभी अनेक। सर अर्थ लिखिए।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि भले ही हमारे धर्म और भाषाएँ अलग-अलग हों, और हम विभिन्न रंगों या रूपों में दिखते हों, फिर भी हम सभी एक हैं। ये बाहरी विविधताएँ हमें कभी अलग या अनेक नहीं बनातीं, बल्कि हमें एकता में रहना चाहिए।
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