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What is the story of 'Chaturvyuham' about, and summarize the first scene of the play?
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यह नाट्यांश 'चतुर्व्यूहम्' नामक पुस्तक से संक्षिप्त और संपादित करके उद्धृत किया गया है। इस नाटक में ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो धनवान और सुखी होना चाहता है। वह एक महीने तक दूध दुहना बंद कर देता है, ताकि महीने के अंत में गाय के शरीर में जमा हुए पर्याप्त दूध को एक बार में बेचकर धन कमा सके। परंतु महीने के अंत में जब वह दूध दुहने का प्रयास करता है, तब उसे एक बूंद भी दूध नहीं मिलता। दूध निकालने के प्रयास में वह गाय के प्रहारों से लहूलुहान हो जाता है, और समझता है कि यदि दैनिक कार्य को एक महीने तक इकट्ठा करके किया जाए तो लाभ के स्थान पर हानि ही होती है।
प्रथमं दृश्यम् (पहला दृश्य)
(मल्लिका लड्डू बनाती हुई धीमी आवाज में शिव की स्तुति करती है।)
(तब लड्डुओं की सुगंध का अनुभव करता हुआ प्रसन्न मन चंदन प्रवेश करता है।)
चंदन: अहा! सुगंध तो मनमोहक है। (देखकर) अरे, लड्डू बनाए जा रहे हैं? (प्रसन्न होकर) तब तक मैं चखता हूँ। (लड्डू लेना चाहता है)
मल्लिका: (क्रोध से) रुको। रुको। इन लड्डुओं को मत छुओ।
चंदन: क्यों क्रोध कर रही हो! तुम्हारे हाथ से बने लड्डू देखकर मैं अपनी जीभ के लालच को नियंत्रित करने में असमर्थ हूँ, क्या तुम यह नहीं जानती?
मल्लिका: मैं अच्छी तरह जानती हूँ, स्वामी! परंतु ये लड्डू पूजा के लिए हैं।
चंदन: तो, जल्दी ही पूजा संपन्न करो। और प्रसाद दो।
मल्लिका: अरे! यहाँ पूजा नहीं होगी। मैं अपनी सखियों के साथ कल सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर जाऊँगी, वहाँ गंगा स्नान और धर्मयात्रा करेंगे।
चंदन: सखियों के साथ! मेरे साथ नहीं! (दुःख का नाटक करता है)
मल्लिका: हाँ। चंपा, गौरी, माया, मोहिनी, कपिला आदि सभी जा रही हैं। अतः, मेरे साथ तुम्हारे आने का कोई औचित्य नहीं है। हम एक सप्ताह के अंत में लौटेंगे। तब तक, घर की व्यवस्था और गाय के दूध दुहने की व्यवस्था का पालन करो।
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