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Observe the diagram given alongside and answer the following questions: Identify the microorganism X and the process involved. Why does the maida dough rise after adding the microorganism X.
Biology
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8 stepsयहाँ आपके प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं:
कैलोरी मान (Calorific value) की व्याख्या करें
- किसी ईंधन का कैलोरी मान वह ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा है जो उस ईंधन की एक इकाई मात्रा (जैसे 1 kg या 1 g) के पूर्ण दहन पर उत्पन्न होती है। यह ईंधन की दक्षता का माप है। इसे आमतौर पर किलो जूल प्रति किलोग्राम () या किलो कैलोरी प्रति किलोग्राम () में व्यक्त किया जाता है।
- कैलोरी मान किसी ईंधन की एक इकाई मात्रा (जैसे 1 kg) के पूर्ण दहन पर उत्पन्न होने वाली ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा है।
मानव गाल कोशिकाओं और पादप कोशिकाओं के बीच अंतर
- मानव गाल कोशिकाएँ (पशु कोशिकाएँ) और पादप कोशिकाएँ संरचना में कई अंतर दिखाती हैं। यहाँ दो मुख्य अंतर दिए गए हैं:
- कोशिका भित्ति (Cell Wall): पादप कोशिकाओं में एक कठोर कोशिका भित्ति होती है जो उन्हें निश्चित आकार और संरचनात्मक सहायता प्रदान करती है, जबकि मानव गाल कोशिकाओं (पशु कोशिकाओं) में कोशिका भित्ति नहीं होती है।
- आकार (Shape): पादप कोशिकाओं का आकार आमतौर पर निश्चित और आयताकार या वर्गाकार होता है, जबकि मानव गाल कोशिकाओं (पशु कोशिकाओं) का आकार अनियमित या गोलाकार होता है क्योंकि उनमें कोशिका भित्ति नहीं होती है।
- रिक्तिकाएँ (Vacuoles): पादप कोशिकाओं में आमतौर पर एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका होती है जो कोशिका के आयतन का एक बड़ा हिस्सा घेरती है, जबकि मानव गाल कोशिकाओं में छोटी, अस्थायी रिक्तिकाएँ होती हैं या बिल्कुल नहीं होती हैं।
- क्लोरोप्लास्ट (Chloroplasts): पादप कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं, जबकि मानव गाल कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट नहीं होते हैं।
- 1. पादप कोशिकाओं में एक कठोर कोशिका भित्ति होती है, जबकि मानव गाल कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती है।
- 2. पादप कोशिकाओं का आकार निश्चित होता है, जबकि मानव गाल कोशिकाओं का आकार अनियमित होता है।
- मानव गाल कोशिकाएँ (पशु कोशिकाएँ) और पादप कोशिकाएँ संरचना में कई अंतर दिखाती हैं। यहाँ दो मुख्य अंतर दिए गए हैं:
कोशिका झिल्ली को चयनात्मक रूप से पारगम्य झिल्ली क्यों कहा जाता है?
- कोशिका झिल्ली को चयनात्मक रूप से पारगम्य झिल्ली (selectively permeable membrane) कहा जाता है क्योंकि यह कोशिका के अंदर और बाहर पदार्थों की गति को नियंत्रित करती है। यह कुछ पदार्थों (जैसे पानी, ऑक्सीजन, पोषक तत्व) को आसानी से गुजरने देती है, जबकि अन्य पदार्थों (जैसे बड़े अणु, हानिकारक पदार्थ) को रोकती है या उनकी गति को नियंत्रित करती है। यह कोशिका के आंतरिक वातावरण को बनाए रखने में मदद करती है।
- कोशिका झिल्ली कुछ पदार्थों को कोशिका के अंदर और बाहर जाने की अनुमति देती है, जबकि अन्य को रोकती है, जिससे कोशिका का आंतरिक वातावरण नियंत्रित रहता है।
कच्चे आमों को खराब होने से बचाने के लिए अचार बनाने में उपयोग की जाने वाली दो तकनीकें/कारक
- कच्चे आमों को अचार बनाने से महीनों तक खराब होने से बचाया जा सकता है क्योंकि अचार बनाने की प्रक्रिया में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकने वाली तकनीकें शामिल होती हैं। दो मुख्य तकनीकें/कारक हैं:
- नमक का उपयोग (Use of Salt): अचार में नमक की उच्च सांद्रता परासरण (osmosis) के माध्यम से सूक्ष्मजीवों से पानी निकाल देती है, जिससे वे निर्जलित हो जाते हैं और उनकी वृद्धि रुक जाती है।
- तेल का उपयोग (Use of Oil): अचार में तेल की एक परत हवा और नमी के संपर्क को रोकती है, जिससे सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की उपलब्धता कम हो जाती है और ऑक्सीकरण भी रुक जाता है।
- अम्ल का उपयोग (Use of Acid): सिरका या नींबू के रस जैसे अम्लीय पदार्थ अचार के pH को कम करते हैं, जिससे अधिकांश सूक्ष्मजीवों के लिए जीवित रहना और प्रजनन करना मुश्किल हो जाता है।
- 1. नमक की उच्च सांद्रता सूक्ष्मजीवों को निर्जलित करके उनकी वृद्धि को रोकती है।
- 2. तेल की परत हवा और नमी के संपर्क को रोककर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को बाधित करती है।
- कच्चे आमों को अचार बनाने से महीनों तक खराब होने से बचाया जा सकता है क्योंकि अचार बनाने की प्रक्रिया में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकने वाली तकनीकें शामिल होती हैं। दो मुख्य तकनीकें/कारक हैं:
दबाव की गणना
- Step 1: प्रारंभिक दबाव की गणना करें। बल () क्षेत्रफल () दबाव () का सूत्र है:
- Step 2: नए क्षेत्रफल की गणना करें। क्षेत्रफल आधा कर दिया गया है:
- Step 3: नए दबाव की गणना करें। बल वही रहता है ()।
- प्रारंभिक दबाव:
- नया दबाव:
बर्तनों के आधार पर बढ़ते दबाव के क्रम में व्यवस्थित करें
- किसी तरल पदार्थ के कारण आधार पर दबाव तरल स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है, न कि बर्तन के आयतन या आधार के क्षेत्रफल पर। सूत्र है , जहाँ तरल का घनत्व, गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण और तरल स्तंभ की ऊँचाई है।
- चित्र से, हम अनुमान लगा सकते हैं कि पानी की ऊँचाई इस प्रकार है:
- बर्तन B में पानी की ऊँचाई सबसे कम है।
- बर्तन A में पानी की ऊँचाई B से अधिक है।
- बर्तन C में पानी की ऊँचाई A से अधिक है।
- बर्तन D में पानी की ऊँचाई सबसे अधिक है।
- इसलिए, बढ़ते दबाव का क्रम ऊँचाई के बढ़ते क्रम के समान होगा।
- बढ़ते दबाव का क्रम:
- कारण: तरल के कारण आधार पर दबाव केवल तरल स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है। जिस बर्तन में पानी की ऊँचाई सबसे कम होगी, उसमें दबाव सबसे कम होगा, और जिस बर्तन में पानी की ऊँचाई सबसे अधिक होगी, उसमें दबाव सबसे अधिक होगा।
एल्यूमीनियम के निष्कर्षण के लिए इलेक्ट्रोलाइसिस
- a) इलेक्ट्रोड A और इलेक्ट्रोड B के रूप में उपयोग की जाने वाली सामग्री:
- एल्यूमीनियम के निष्कर्षण के लिए हॉफमैन-हैरॉल्ट प्रक्रिया में, इलेक्ट्रोड कार्बन (ग्रेफाइट) से बने होते हैं।
- इलेक्ट्रोड A (कैथोड) और इलेक्ट्रोड B (एनोड) दोनों ग्रेफाइट (कार्बन) से बने होते हैं।
- b) इस इलेक्ट्रोलाइसिस प्रक्रिया को करने के लिए उपयुक्त इलेक्ट्रोलाइट:
- एल्यूमीनियम के निष्कर्षण के लिए इलेक्ट्रोलाइट पिघला हुआ एल्यूमिना () होता है, जिसे क्रायोलाइट () में घोला जाता है ताकि उसके गलनांक को कम किया जा सके और चालकता बढ़ाई जा सके।
- a) इलेक्ट्रोड A और B दोनों के लिए: ग्रेफाइट (कार्बन)
- b) उपयुक्त इलेक्ट्रोलाइट: पिघला हुआ एल्यूमिना () क्रायोलाइट () में घुला हुआ
- a) इलेक्ट्रोड A और इलेक्ट्रोड B के रूप में उपयोग की जाने वाली सामग्री:
पेट्रोलियम उत्पादों का पृथक्करण और पहचान
- a) पेट्रोलियम में मौजूद विभिन्न घटकों को अलग करने के लिए उपयोग की जाने वाली प्रक्रिया का नाम:
- पेट्रोलियम के विभिन्न घटकों को उनके क्वथनांक में अंतर के आधार पर अलग करने की प्रक्रिया को प्रभाजी आसवन (fractional distillation) कहा जाता है।
- b) निम्नलिखित पेट्रोलियम उत्पादों की पहचान करें:
- X - मोमबत्तियाँ और मलहम बनाने के लिए उपयोग किया जाता है: पैराफिन मोम (Paraffin wax)
- Y - सड़कों की सतह बनाने के लिए उपयोग किया जाता है: बिटुमेन (Bitumen) या डामर (Asphalt)
- Z - भारी वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है: डीजल (Diesel)
- P - स्टोव और लैंप में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है: केरोसिन (Kerosene)
- a) प्रक्रिया का नाम: प्रभाजी आसवन (Fractional distillation)
- b) उत्पादों की पहचान:
- X: पैराफिन मोम (Paraffin wax)
- Y: बिटुमेन (Bitumen) / डामर (Asphalt)
- Z: डीजल (Diesel)
- P: केरोसिन (Kerosene)
- a) पेट्रोलियम में मौजूद विभिन्न घटकों को अलग करने के लिए उपयोग की जाने वाली प्रक्रिया का नाम:
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