Simant utpadakta hash niyam par sanchhipat tipadi likhiye
Economics
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सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम (Law of Diminishing Marginal Utility) अर्थशास्त्र का एक मौलिक सिद्धांत है जो बताता है कि जैसे-जैसे कोई उपभोक्ता किसी वस्तु की अधिक इकाइयों का उपभोग करता है, वैसे-वैसे उस वस्तु की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से प्राप्त होने वाली संतुष्टि (सीमांत उपयोगिता) घटती जाती है।
संक्षेप में:
- परिभाषा: जब कोई व्यक्ति किसी वस्तु की उत्तरोत्तर अधिक इकाइयों का उपभोग करता है, तो प्रत्येक अगली इकाई से मिलने वाली अतिरिक्त संतुष्टि (सीमांत उपयोगिता) कम होती जाती है।
- उदाहरण: यदि कोई व्यक्ति भूखा है और उसे रोटी दी जाती है, तो पहली रोटी से उसे सबसे अधिक संतुष्टि मिलेगी। दूसरी रोटी से संतुष्टि मिलेगी, लेकिन पहली से कम। तीसरी रोटी से और कम, और एक बिंदु ऐसा आ सकता है जब उसे और रोटी खाने की इच्छा न हो या उससे नकारात्मक संतुष्टि मिले।
- मान्यताएँ: यह नियम कुछ मान्यताओं पर आधारित है, जैसे कि उपभोग की जाने वाली वस्तु की इकाइयाँ समरूप होनी चाहिए, उपभोग निरंतर होना चाहिए, और उपभोक्ता की पसंद या आय में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए।
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