Bajat set ki kimat our aay me parivartan ke parbhao ko alag alag chitro me dikhaiye
Economics
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बजट सेट (Budget Set) और बजट रेखा (Budget Line) उपभोक्ता की आय और वस्तुओं की कीमतों को देखते हुए उन सभी बंडलों (वस्तुओं के संयोजनों) को दर्शाते हैं जिन्हें उपभोक्ता खरीद सकता है।
यहां बजट सेट पर कीमत और आय में परिवर्तन के प्रभाव को अलग-अलग चित्रों के माध्यम से समझाया गया है:
1. कीमत में परिवर्तन का प्रभाव (Effect of Change in Price)
जब किसी एक वस्तु की कीमत बदलती है, तो बजट रेखा घूम जाती है (rotates)।
- एक वस्तु की कीमत में कमी: यदि वस्तु X की कीमत कम हो जाती है, जबकि वस्तु Y की कीमत और उपभोक्ता की आय स्थिर रहती है, तो उपभोक्ता अब वस्तु X की अधिक मात्रा खरीद सकता है। इससे बजट रेखा का X-अक्ष पर अंतःखंड (intercept) बाहर की ओर खिसक जाता है, जबकि Y-अक्ष पर अंतःखंड अपरिवर्तित रहता है। बजट रेखा अधिक सपाट (flatter) हो जाती है।
- एक वस्तु की कीमत में वृद्धि: यदि वस्तु X की कीमत बढ़ जाती है, जबकि वस्तु Y की कीमत और उपभोक्ता की आय स्थिर रहती है, तो उपभोक्ता अब वस्तु X की कम मात्रा खरीद सकता है। इससे बजट रेखा का X-अक्ष पर अंतःखंड अंदर की ओर खिसक जाता है, जबकि Y-अक्ष पर अंतःखंड अपरिवर्तित रहता है। बजट रेखा अधिक खड़ी (steeper) हो जाती है।
चित्र 1: कीमत में परिवर्तन का प्रभाव
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| Y (वस्तु Y की मात्रा)
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| / (मूल बजट रेखा)
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|/_________________> X (वस्तु X की मात्रा)
0 (M/Px_new) (M/Px_old)
(यहां, M उपभोक्ता की आय है, Px वस्तु X की कीमत है।
जब Px कम होता है, तो M/Px_new > M/Px_old, जिससे X-अअक्ष पर अंतःखंड बाहर खिसकता है।
यदि Px बढ़ता है, तो M/Px_new < M/Px_old, जिससे X-अक्ष पर अंतःखंड अंदर खिसकता है।)
- मूल बजट रेखा: वह रेखा जो मूल कीमत पर वस्तु X और Y के अधिकतम खरीद योग्य संयोजनों को दर्शाती है।
- कीमत में कमी पर: यदि वस्तु X की कीमत कम होती है, तो बजट रेखा X-अक्ष पर बाहर की ओर घूम जाती है (अधिक सपाट हो जाती है), जिससे उपभोक्ता वस्तु X की अधिक मात्रा खरीद सकता है।
- कीमत में वृद्धि पर: यदि वस्तु X की कीमत बढ़ती है, तो बजट रेखा X-अक्ष पर अंदर की ओर घूम जाती है (अधिक खड़ी हो जाती है), जिससे उपभोक्ता वस्तु X की कम मात्रा खरीद सकता है।
2. आय में परिवर्तन का प्रभाव (Effect of Change in Income)
जब उपभोक्ता की आय बदलती है, जबकि दोनों वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो बजट रेखा समानांतर रूप से खिसक जाती है (shifts parallelly)।
- आय में वृद्धि: यदि उपभोक्ता की आय बढ़ जाती है, तो वह दोनों वस्तुओं की अधिक मात्रा खरीद सकता है। इससे बजट रेखा मूल बजट रेखा के समानांतर बाहर की ओर खिसक जाती है। बजट सेट का आकार बढ़ जाता है।
- आय में कमी: यदि उपभोक्ता की आय कम हो जाती है, तो वह दोनों वस्तुओं की कम मात्रा खरीद सकता है। इससे बजट रेखा मूल बजट रेखा के समानांतर अंदर की ओर खिसक जाती है। बजट सेट का आकार सिकुड़ जाता है।
चित्र 2: आय में परिवर्तन का प्रभाव
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| Y (वस्तु Y की मात्रा)
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| / (नई बजट रेखा - आय वृद्धि)
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| / (मूल बजट रेखा)
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|/_________________> X (वस्तु X की मात्रा)
0
(यहां, आय में वृद्धि होने पर, बजट रेखा समानांतर रूप से बाहर की ओर खिसकती है।
आय में कमी होने पर, बजट रेखा समानांतर रूप से अंदर की ओर खिसकती है।)
- मूल बजट रेखा: वह रेखा जो मूल आय पर वस्तु X और Y के अधिकतम खरीद योग्य संयोजनों को दर्शाती है।
- आय में वृद्धि पर: बजट रेखा मूल रेखा के समानांतर बाहर की ओर खिसक जाती है, जिससे उपभोक्ता दोनों वस्तुओं की अधिक मात्रा खरीद सकता है।
- आय में कमी पर: बजट रेखा मूल रेखा के समानांतर अंदर की ओर खिसक जाती है, जिससे उपभोक्ता दोनों वस्तुओं की कम मात्रा खरीद सकता है।
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