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Explain the trends of ionization energy down the groups of the elements in the periodic table. How are the higher values of ionisation energies of the 5d transition elements justified?
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आयनीकरण ऊर्जा (Ionization energy) वह न्यूनतम ऊर्जा है जो एक गैसीय परमाणु से उसके सबसे शिथिल बंधे हुए इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक होती है।
Step-by-step solution
2 stepsसमूह में आयनीकरण ऊर्जा का रुझान समझाना।
एक समूह में नीचे जाने पर, परमाणु का आकार बढ़ता है क्योंकि नए ऊर्जा स्तर जुड़ते जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते जाते हैं और नाभिक का आकर्षण उन पर कम हो जाता है। साथ ही, आंतरिक इलेक्ट्रॉनों द्वारा परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) भी बढ़ता है, जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश (effective nuclear charge) कम हो जाता है। इन दोनों कारकों के कारण, एक समूह में नीचे जाने पर आयनीकरण ऊर्जा घटती जाती है।
5d संक्रमण तत्वों की उच्च आयनीकरण ऊर्जा का औचित्य।
सामान्य प्रवृत्ति के अनुसार, 5d संक्रमण तत्वों की आयनीकरण ऊर्जा 4d संक्रमण तत्वों की तुलना में कम होनी चाहिए। हालांकि, 5d संक्रमण तत्वों की आयनीकरण ऊर्जा 4d तत्वों की तुलना में अधिक होती है, और कभी-कभी 3d तत्वों के बराबर या उनसे भी अधिक होती है। इसका मुख्य कारण लैंथेनाइड संकुचन (lanthanide contraction) है। लैंथेनाइड संकुचन 4f इलेक्ट्रॉनों के खराब परिरक्षण प्रभाव के कारण होता है। 4f इलेक्ट्रॉन नाभिकीय आवेश को प्रभावी ढंग से परिरक्षित नहीं कर पाते हैं, जिससे 5d तत्वों में प्रभावी नाभिकीय आवेश अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए प्रभावी नाभिकीय आवेश के कारण, 5d तत्वों का आकार अपेक्षा से छोटा हो जाता है और उनके बाहरी इलेक्ट्रॉनों को निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी आयनीकरण ऊर्जा उच्च होती है।
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