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धातुओं और अम्लों की अभिक्रिया जब कॉपर (Cu) की अभिक्रिया तनु नाइट्रिक अम्ल (dil.HNO3) और सांद्र नाइट्रिक अम्ल (conc. HNO3) के साथ अलग-अलग कराई जाती है, तो उत्पन्न होने वाली गैसें क्रमशः कौन सी होती हैं और इस अभिक्रिया में HNO3 किस रूप में कार्य करता है?
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स्टेप 1: तनु नाइट्रिक अम्ल (dil.HNO₃) के साथ कॉपर (Cu) की अभिक्रिया।
जब कॉपर तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है, तो नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) गैस उत्पन्न होती है।
अभिक्रिया:
स्टेप 2: सांद्र नाइट्रिक अम्ल (conc. HNO₃) के साथ कॉपर (Cu) की अभिक्रिया।
जब कॉपर सांद्र नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है, तो नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) गैस उत्पन्न होती है।
अभिक्रिया:
स्टेप 3: उत्पन्न होने वाली गैसों की पहचान।
तनु नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया से NO गैस उत्पन्न होती है।
सांद्र नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया से NO₂ गैस उत्पन्न होती है।
तो, क्रमशः उत्पन्न होने वाली गैसें NO और NO₂ हैं।
स्टेप 4: HNO₃ की भूमिका।
दोनों अभिक्रियाओं में, कॉपर (Cu) का ऑक्सीकरण होता है (0 से +2 तक)। नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था +5 होती है। NO में नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है और NO₂ में +4 है। चूंकि नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था कम हो रही है, HNO₃ का अपचयन हो रहा है। इसलिए, HNO₃ एक प्रबल उपचायक (Strong Oxidizing Agent) के रूप में कार्य करता है।
स्टेप 5: सही विकल्प का चयन।
उत्पन्न होने वाली गैसें क्रमशः NO और NO₂ हैं, और HNO₃ एक प्रबल उपचायक के रूप में कार्य करता है। यह विकल्प (B) से मेल खाता है।
B)
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